अब लखनऊ और नोएडा में SSP की जगह पुलिस कमिश्‍नर  नोएडा से अलोक सिंह ओर लखनऊ से सुजित पांडेय होंगे प्रथम पुलिस कमिश्नर।

UP में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू।
अब लखनऊ और नोएडा में SSP की जगह पुलिस कमिश्‍नर
 नोएडा से अलोक सिंह ओर लखनऊ से सुजित पांडेय होंगे प्रथम पुलिस कमिश्नर।


लखनऊ: योगी आदित्यनाथ सरकार ने लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को लागू करने के फैसले पर मुहर लगा दी है. कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगाई गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि एडीजी स्तर के अधिकारी की पुलिस कमिश्नर पद पर तैनाती होगी.इस फैसले के बाद में लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरों की तैनाती.इन दोनों शहरों के पुलिस कमिश्नरों के नामों की घोषणा भी कर दी गई हैं .नोएडा से अलोक सिंह ओर लखनऊ से सुजित पांडेय होंगे प्रथम पुलिस कमिश्नर।
कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि भविष्य में उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े जिलों में भी पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जाएगी. गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मौके आए जब शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू करने की बात उठी, लेकिन मामला हर बार ठंडे बस्ते में चला गया.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों ने इस व्यवस्था को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई. उन्होंने कहा कि स्मार्ट शहर और महिला सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम काफी उपयोगी साबित होगा. उन्होंने कहा कि यूपी जैसे राज्य के लिए पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था की जरूरत है.पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार में भी तत्कालीन डीजीपी रिजवान अहमद ने इसकी कवायद शुरू की थी, लेकिन प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका था. जानकार इसे वर्चस्व कि लड़ाई के रूप में देखते हैं. जहां एक तरफ आईपीएस अपने अधिकारों को पाने के लिए बेचैन दिखाई देता हैं तो वहीं दूसरी ओर आईएएस खेमा अपने अधिकारों को न छिनने देने के लिए लगा रहता है.
गौरतलब है कि कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद डीएम के अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाएंगे. डीएम को कानून और व्यवस्था के मामले में सीआरपीसी में 107 से 122 शांति भंग और हैबिट्यूल ऑफेंडर आदि तक के अधिकार हैं. वहीं, 133 सीआरपीसी पब्लिक न्यूसेन्स में कार्रवाई के अधिकार हैं. साथ ही 144 सीआरपीसी लागू करने का भी आधिकार है.
145 सीआरपीसी कुर्की आदि कि कार्रवाई, शस्त्र लाइसेंस जारी करने का अधिकार भी जिलाधिकारी के पास है. वहीं इसके साथ आर्म्स एक्ट में कार्रवाई, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और एनएसए लगाने का अधिकार भी डीएम के पास है. अभी तक की व्यवस्था में ज्यादातर मामलों में पुलिस से रिपोर्ट ली जाती है, पर फाइनल अथॉरिटी जिलाधिकारी के पास ही होती है.
लेकिन, पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद यह सारे अधिकार जिले के पुलिस कमिश्नर के पास आ सकते हैं... यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किए गए तो. बता दें कि कमिशनरी सिस्टम लागू होने पर जिलाधिकारी के मजिस्ट्रियल पावर खास तौर पर कानून और व्यवस्था संबंधित अधिकार पुलिस कमिश्नर के अधीन हो जाएंगे. हालांकि, आईपीएस इसके लागू होने को आमजन के लिए और कानून और व्यवस्था कि दृष्टि से बेहतर मानते हैं. वहीं आईएएस इसको मोनोपोली के नजरिये से देखते है.
पुलिस कमीशनरी सिस्टम उत्तर प्रदेश के बाहर कई बड़े शहरों में पहले से लागू है. चाहे मुम्बई हो, दिल्ली हो, बेंगलुरु हो या फिर गुरुग्राम. पुलिस कमिशनरी सिस्टम में कमिश्नर के अलावा हर एक क्षेत्र के लिए डीसीपी, एसीपी लेवल के अधिकारी नियुक्त होते हैं जो बेहतर पोलिसिंग में सहायक होते हैं.


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