मलेशिया सरकार, पाकिस्तान सरकार, सऊदी अरब सरकार और फिलिस्तीन सरकार ने अपने यहां कोरोना के मरीजों का जो डाटा बना रही है उसमें तबलीगी जमात का कालम जोड़कर यह लिखा जा रहा है कि कौन-कौन से मरीज तबलीगी जमात के कार्यक्रम से आए

मलेशिया सरकार, पाकिस्तान सरकार, सऊदी अरब सरकार और फिलिस्तीन सरकार ने अपने यहां कोरोना के मरीजों का जो डाटा बना रही है उसमें तबलीगी जमात का कालम जोड़कर यह लिखा जा रहा है कि कौन-कौन से मरीज तबलीगी जमात के कार्यक्रम से आए


 क्योंकि तबलीगी जमात का कार्यक्रम मलेशिया में हुआ था पाकिस्तान में भी हुआ था और भारत में भी हुआ था और पाकिस्तान और मलेशिया के तबलीगी जमात के कार्यक्रम में सऊदी अरब फिलिस्तीन और दूसरे कई इस्लामिक देशों के लोग गए थे।


 दरअसल किसी भी संक्रमण बीमारी में मरीज का यह डाटा रखना जरूरी होता है उस बीमारी का मूल सोर्स उसमें कहां से आया और साथ ही साथ आने वाले भविष्य  में जब डॉक्टर और वैज्ञानिक लोग इस पर रिसर्च करेंगे तब उनको भी यह जानने में मदद मिलेगी कि करोना वायरस का कम्युनिटी लेवल पर संक्रमण कितना हुआ और विदेशों से कितना संक्रमण आया।


ऊपर के सभी देख इस्लामिक हैं उन्हें जमातीयो  का अलग कलम बनाने में कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन इधर भारत में बंगाल सरकार राजस्थान सरकार और महाराष्ट्र सरकार ने आपत्ति जताई है कि जमातीओं का अलग कलम नहीं बनाया जाए और इन राज्य सरकारों ने जमातीयों का डाटा हटा दिया है


 


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