लूट की वारदात का अल्पीकरण के बावजूद भी खुलासा करने में पुलिस नाकाम

लूट की वारदात का अल्पीकरण के बावजूद भी खुलासा करने में पुलिस नाकाम


कसया कस्बे के गैस एजेंसी वितरक से हुई थी 3 लाख रुपये की लूट की घटना 


चर्चा है कि अपराधियों की धरपकड़ से परहेज कर शराब की बिक्री कराने में जुटी पुलिस


आखिर हत्या के प्रयास के आरोपियों को गिरफ्तार क्यो नही कर रही पुलिस, चर्चा का विषय


कुशीनगर। जिले के कसया थाना क्षेत्र में अपराधी खुलकर तांडव कर रहे हैं, लेकिन पुलिस बदमाशों पर अंकुश लगाना तो दूर की बात है घटनाओं को ही गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। कोई लुट जाए, पिट जाए अथवा गायब हो जाए या किसी पर जानलेवा हमला हो जाये, लेकिन कसया पुलिस को इससे कोई सरोकार नही है और अपराधी खुले में घूम रहे हैं जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। चर्चा है कि पुलिस अपराधियों की धरपकड़ न कर थाने के मालखाने के शराब की खपत करने में जुटी हुई है। 
        कसया थाने की पुलिस पीड़ितों की रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही करने के बजाय लीपापोती कर पीड़ित को किसी तरह से थाने से टरकाने में जुट जाती है, जैसी की चर्चा है। यही कारण है कि थाना क्षेत्र में अपराधिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है और मामलों में पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने के कारण जहां पीड़ितों में पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। बदमाशों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। थाने के समीपवर्ती कुशीनगर मार्ग सर्वाधिक संवेदनशील व सुरक्षित माने जाने वाला मार्ग है। उसके बावजूद भी बदमाशों ने गैस एजेंसी वितरक से तीन लाख नकदी दिनदहाड़े उस समय लूट ली, जब वह गैस सिलेंडर की बिक्री के बाद रुपयों का मिलान कर रहे थे। सूचना दिए जाने पर भी पुलिस भी मौके पर पहुंची और जल्द ही खुलासा करने की बात कही, उसके बाद पुलिस ने उक्त मामले में चोरी का अभियोग दर्ज तो कर लिया, लेकिन अब तक घटना के खुलासे के लिए पुलिस के प्रयास नाकाफी हैं, घटना के पर्दाफाश न होने से अपराधी खुले में घूम रहे हैं और व्यवसायी दहशत में है। अगर पुलिस घटनाओं का खुलासा और बदमाशों की गिरफ्तारी करे तो बदमाशों के मन में कुछ भय भी बना रहे। मगर, यहां पुलिस बदमाशों को पकड़ने के बजाय पीड़ितों को सिर्फ आश्वासन देकर थाने से चलता कर देती है। अधिकांश घटनाओं में रिपोर्ट तो दर्ज की ही नहीं जाती और यदि की भी जाती है तो लूट की घटना को चोरी में दर्ज किया जाता है। वह भी उस हालत में जब पीड़ित के लूट में कुछ आवश्यक कागजात या मोबाइल आदि चले जाते हैं। जिसमें पुलिस रिपोर्ट की आवश्यकता होती है। दूसरी बड़ी घटना बीते वर्ष अगस्त माह की है जब देश के सभी लोग आजादी का जश्न मना रहे थे, उसी समय एक युवती जो घर मे अकेली थी, उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर जलाने का प्रयास किया गया, जैसा कि उस समय अंजली कुशवाहा पुत्री कुश निवासी परसौनी मुकुन्हा ने तहरीर देकर बताई थी कि गम्भीर रूप से जल चुकी मेरी बड़ी बहन संगीता को गोरखपुर मेडिकल कालेज भर्ती कराया गया, जहां वह जीवन मौत से जूझ रही है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने नामजद 6 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा तो पंजीकृत कर लिया, लेकिन पुलिस कार्रवाई करने से परहेज करती रही,बाद में 3 आरोपियों ने आत्म समर्पण कर दिया। उसके बाद बचे तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करना पुलिस ने मुनासिब नही समझा, जिससे उनका मनोबल बढ़ा हुआ है।


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