पी एफ मे हो गये महाघोटाले और अब वेतन के भी पड़ गये लाले

लोकतंत्र का लूट तंत्र बनी UPPCL


पी एफ मे हो गये महाघोटाले और अब वेतन के भी पड़ गये लाले
लखनऊ 13 नवम्बर पूरे उ प्र को बिजली से रोशन करने वाले उ प्र
पावर कार्पोरेशन के लगभग 50
हजार नियमित कर्मचारियो के भविष्य की खून पसीने से जमा करी गयी  भविष्य निधि घोटाले की घटना से इन कर्मचारियो के परिवार मे अंधेरा छाया हुआ है और मजे की बात है कि जीरो टालरेंस का दावा करने वाली इस सरकार के नाक के नीचे उन्ही के द्वारा अवैध रूप से नियुक्त बड़ेबाबुओ ( IAS) ने बड़े सुनयोजित ढंग से कर्मचारियो के भविष्य निधि (पी एफ) के करोड़ो की रकम को लूटने के खेल को अमली जामा पहनाया और जब खुलासा हुआ तब काफी देर हो चुकी थी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के आदेश पर जो अक्टूबर माह का वेतन दीपावली से पूर्व ही कर्मचारियो को मिल जाना चाहिये था नही मिला जबकि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के आदेश पर यह वेतन दिवाली के पूर्व ही वितरण होना था पर अब तो देव दीपावली/ गंगा स्नान  भी हो गया कर्मचारी अपने पी एफ घोटाले के मुख्य आरोपी घोटाले के वक्त मौजूद uppcl व इसकी सहयोगी कम्पनीयो के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक  UPPCL व जल विद्युत के गिरफ्तारी की मांग और पीएफ घोटाले के बाद उ प्र सरकार से भुगतान के जिम्मेदारी की मांग पर लगातार आन्दोलन रत होने के बावजूद सरकार कर्मचारियो की मांग पर सीधे कुछ भी बोलने से कतराते नजर आ रही है जिससे एक बात तो साफ है कि सरकार पी एफ घोटाले के जिम्मेदार लोगों को सीधे तौर पर बचाते हुए कर्मचारियो के भविष्य निधि के घोटाले की पूरी कहानी पर लीपापोती ही नहीं पूर्व सरकार पर डालने के मूड मे नजर आ रही है क्योकि जिम्मेदारो को सीधे नवीन तैनाती और तो और पदोन्नति प्रदान कर दी गयी है वही कर्मचारी संगठनों ने सीधे तौर पर जिम्मेदारों की गिरफ्तारी पी एफ भुगतान की जिम्मेदारी और सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी करने से कम पर आंदोलन की राह से पीछे हटने को तैयार नजर नही आ रही है 14 नवम्बर को राजधानी लखनऊ मे बड़ी रैली का आयोजन भी किया गया है जिसमें अधिकारीयो व कर्मचारियों को अपने परिवार को भी साथ लाने का अनुरोध किया जा रहा है वैसे तो सरकार ने अभी तक धारा 144 नहीं हटाई है वैसे तो हमारे सूत्र बता रहे है कि दोनो तरफ तैयारियां जोरो पर है क्या सन्2000 वाला आदोलन फिर से तो नहीं होने जा रहा है
*80 इंजीनियरों के भ्रष्टाचार की जाँच कही पीएफ के अरबो के घोटाले के आंदोलन को दबाने की साजिश तो नही*
वर्तमान मे कर्मचारियो के भविष्य निधि घोटाले के आरोपियों की गिरफ्तारी कर्मचारियो के पी एफ की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर जबाब देने से कतराती उ प्र सरकार ने 80 इंजीनियरो पर कार्यवाही की तलवार लटकाने की घोषणा सरकार की कथनी करनी पर अनेको सवाल खड़े होते नजर आ रहे है जब लगभग 50 हजार कर्मचारियों  अपने खून पसीने की लूटी रकम पाने के लिये सरकार से भुगतान के जिम्मेदारी लेने की मांग को ले कर सड़क पर है उसी बीच पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कार्यवाही का दबाव बनाना कही हक की आवाज उठाने वाले कर्मचारियो/अभियन्ताओ के आंदोलन दबाने  की ओर इशारा तो नही है वैसे एक बात समझ के परे है कि सन् 2000-2001 से आज तक जब से परिषद का विघटन कर के कम्पनी बनाई गयी है तो घाटा कम होने की बजाय बढता क्यो चला जा रहा है जब कि तब से लेकर आज तक इन कम्पनीयो की कमान भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारीयो के ही हाथ रही है मात्र कुछ वर्षों के लिए एक प्रबंध निदेशक अभियन्ता ए पी मिश्र थे परन्तु उनके उपर भी अवैध रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजय अग्रवाल जी को बैठाया गया था फिर भी क्या कमी रह गई जो फिर भी घाटा कम होनेकी जगह साल दर साल बढता ही चला गया और निरन्तर सुधारों और प्रयोगों की प्रयोगशाला बना यह प्रदेश को रौशन व समृद्ध बनाने वाला यह विभाग आज अपने ही कर्मचारियों और अभियन्ताओ को वेतन भी नहीं दे पाने मे असमर्थ हैं वैसे कारणो की एक श्रृंखला का खुलासा जल्दी ही प्रगति यात्रा अपने आगामी अंक मे करने जा रही है ।