हिस्ट्रीशीटर राजा बाबू हत्याकांड में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त सीजेएम ने प्रकरण में अग्रिम विवेचना का दिया आदेश पुलिस की विवेचना को कोर्ट ने संदिग्ध मानते हुए लिया फैसला मृतक के भाई के जरिये पेश सबूतों को भी दृष्टिगत रखते हुए विवेचना करने का कोर्ट ने दिया आदेश

हिस्ट्रीशीटर राजा बाबू हत्याकांड में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त
सीजेएम ने प्रकरण में अग्रिम विवेचना का दिया आदेश
पुलिस की विवेचना को कोर्ट ने संदिग्ध मानते हुए लिया फैसला
मृतक के भाई के जरिये पेश सबूतों को भी दृष्टिगत रखते हुए विवेचना करने का कोर्ट ने दिया आदेश


बाहुबली न्यूज़ सुलतानपुर। बहुचर्चित शारदा प्रताप सिंह उर्फ राजा बाबू हत्याकांड में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने निरस्त कर दिया है। सीजेएम हरीश कुमार ने मृतक के भाई के जरिये साक्ष्यों के आधार पर उठाये गये तथ्यों को भी दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण की अग्रिम विवेचना कराये जाने के सम्बंध में आदेशित किया है। अदालत के इस आदेश से पुलिस विभाग को बड़ा झटका लगा है।
                    मामला कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित रामनगर कोट गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर शारदा प्रसाद सिंह उर्फ राजा बाबू व उसके साथी को 19 अगस्त 2018 को कबरी गांव में भीड़ के जरिये रंगदारी मांगने के विरोध में मार डालने का मामला सामने आया था। इस घटना के सम्बंध में मृतक राजा बाबू के भाई महेन्द्र प्रताप सिंह ने कबरी प्रधान जेपी निषाद सह आरोपी शम्भू, अनंत सिंह, कृष्णा सिंह, संतोष निषाद, रवि सिह, जितेन्द्र उर्फ पप्पू सिंह, मनोज सिंह सहित अन्य पर साजिश के तहत अपने भाई व उसके साथियों को बुलाकर हत्या करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की विवेचना तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक रणजीत सिंह ने शुरू की। जिसके उपरांत तत्कालीन कोतवाल विष्णु कुमार मिश्रा ने प्रकरण की तफ्तीश को आगे बढ़ाया। अंत में प्रकरण की तफ्तीश तत्कालीन कोतवाल नंद कुमार तिवारी के जरिये पूरी की गयी। जिन्होंने अपनी तफ्तीश में दर्शाया कि शारदा प्रसाद आपराधिक प्रवृत्ति का रहा,जो लोगों को धमकाकर लूट करता था, जिस पर गैंगस्टर सहित अन्य मामला भी दर्ज रहा। इसके अलावा विवेचक नन्द कुमार तिवारी ने अपनी तफ्तीश में यह भी बताया कि शारदा प्रताप सिंह ने घटना के पूर्व अपने साथियों के साथ कबरी प्रधान जेपी निषाद के घर रंगदारी माँगने पहुंचा। जहां पर उसकी माँ को मारापीटा और उनके घर मे तोड़फोड़ भी किया। विवेचक के मुताबिक शोर-शराबा सुनकर इकट्ठा हुई भीड़ ने शारदा प्रताप व उसके साथी धनन्जय यादव व मोहित मिश्रा पर हमला बोल दिया। जिसके चलते भीड़ की चपेट में आने से शारदा प्रताप व धनन्जय यादव की मौत हो गयी। इसी आधार पर तत्कालीन कोतवाल ने अपनी विवेचना पूर्ण करते हुए आरोपियों को क्लीन चिट दे दी। पुलिस की विवेचना पर मृतक शारदा प्रताप के भाई महेन्द्र प्रताप ने सवाल उठाते हुए प्रोटेस्ट अर्जी दी। महेन्द्र प्रताप का आरोप है कि साजिश के तहत शारदा प्रताप व उसके साथियों को कबरी प्रधान जेपी निषाद ने बार-बार फोन करके अपने घर बुलाया था और इसी साजिश के परिणाम स्वरूप उनकी हत्या कर दी गयी। इस मामले में मृतक के भाई के जरिये पेश किये गये तथ्यों एवं सबूतों को दृष्टिगत रखते हुए सीजेएम हरीश कुमार ने पुलिस की विवेचना को संदिग्ध मानते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने मृतक के भाई के जरिये पेश किये गये तर्कों एवं साक्ष्यों को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण की अग्रिम विवेचना किये जाने के सम्बंध में आदेश पारित किया है। अदालत के इस आदेश से पुलिस के जरिये भेजी गयी फाइनल रिपोर्ट सवालों से घिर गई है। पुलिस को कोर्ट के इस आदेश से एक चर्चित मामले में बड़ा झटका लगा है।