भू-माफियाओं से साठगांठ कर किसानों की जमीन दूसरों को नाप रहा लेखपाल वरासत मामलों में हजारों की कर रहा वसूली

भू-माफियाओं से साठगांठ कर किसानों की जमीन दूसरों को नाप रहा लेखपाल
वरासत मामलों में हजारों की कर रहा वसूली
मामले में डीएम से शिकायत, एसडीएम से मांगी रिपोट
तहसील महसी के मुरौव्वा का मामला
बहराइच। सरकार जहां भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों को जबरन बीआरएस दे रही है, नौकरी से निकाला जा रहा है। बावजूद इसके कुछ कर्मचारियों पर इसका असर नहीं दिखाई दे रहा है। भ्रष्ट्रार उनका पुराना शगल बन चुका है। तहसील महसी में एक ऐसे लेखपाल की तैनाती है जिनका पेशा किसानों की जमीन दूसरों को पैंसा लेकर पैमाइश कर देना, वरासत के लिए पैसे वसूलना तथा छमाही रकम लेकर ग्राम समाज की जमीन भू-माफियाओं को देना पेशा बन गया है। मामला तहसील महसी के ग्राम मुरौव्वा का है। जहां तैनात लेखपाल रंगीलाल ने पैसे लेकर कई वर्षो से काबिज किसान की जमीन दूसरे को नाप दिया। मामले में पीडि़त किसान द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई। जिस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम महसी से मामले में रिपोट मांगी है। गौरतलब हो कि ग्राम पंचायत मुरौव्वा में आदित्यभान सिंह की गाटा सं. 422 जमीन स्थित है। जिस पर बीते 10-12 वर्षों से वे काबिज थे। खेत में बोरिंग भी थी। चकबंदी विभाग द्वारा पैमाइश कर उन्हें कब्जा दिया गया था। बीते दो सप्ताह पूर्व तैनात लेखपाल रंगीलाल द्वारा गंगापुरवा निवासी एक व्यक्ति से पैसा लेकर उनको नाप दिया गया। लेखपाल से जब इस बारे में किसानों ने पूछा तो उन्होंने कोई भी बात करने से मना कर दिया। यही नहीं गांव के पूर्व आईएएस लालजी सिंह के भाई किसान ननकए सिंह से पैतृक जमीन की वरासत को लेकर 900 रूपये वसूल लिए। जिसके बाद किसी तरह उनकी वरासत करायी। वहीं किसान सम्मान योजना में लाभ दिलाने का झांसा देकर 500 रूपये ले लिया। जबकि उसका लाभ भी किसान को अब तक नहीं मिला। यही नहीं लेखपाल द्वारा सीतापुर जनपद के नदी पार निवासियों से पांच-पांच हजार रूपये लेकर ग्राम समाज की जमीन दे दी गई। जिस पर सीतापुर के किसान आज भी काबिज है। बीते कई वर्षों से तैनात लेखपाल रंगीलाल का भू-माफियाओं से सांठगांठ कोई नया कारनामा नहीं है। अक्सर वे अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहते है। मामले में पीडि़त किसान ननकए सिंह द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई है। जिस पर इस मामले में भी डीएम ने एसडीएम महसी से रिपोट मांगी है। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी से शिकायत के बाद इस भ्रष्ट लेखपाल पर कार्रवाई हो पाती है अथवा नहीं। मामले में जब एसडीएम महसी के मोबाइल नम्बर पर बात करने की कोशिश की गई तो उनका नम्बर स्वीच आफ बताता रहा।